भारतीय मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और उनका समाधान
हालांकि नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पौधों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। सघन खेती ने भारतीय मिट्टी से इन पोषक तत्वों को खत्म कर दिया है, जिससे फसलों में छिपी हुई भूख पैदा हो रही है।
तीन सबसे आम कमियां हैं: 1. **जिंक (Zn)**: मक्का और धान में पत्तियों के तांबे जैसे या पीले होने के रूप में प्रकट होता है (खैरा रोग)। जिंक सल्फेट (10 किग्रा/एकड़) डालकर ठीक करें। 2. **आयरन (Fe)**: युवा पत्तियों की नसों के बीच पीलापन (इंटरवेनल क्लोरोसिस) के रूप में दिखाई देता है। फेरस सल्फेट (0.5% घोल) का छिड़काव करके ठीक करें। 3. **बोरॉन (B)**: सरसों और सूरजमुखी में तने के फटने और बीज के खराब विकास का कारण बनता है। बोरेक्स (2.5 किग्रा/एकड़) का उपयोग करके ठीक करें।
हमेशा एनपीके (NPK) मिट्टी स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्व परीक्षण भी चलाएं।