राजस्थान में कपास के लिए ड्रिप सिंचाई का अनुकूलन
राजस्थान के कृषि क्षेत्र में पानी की कमी सबसे बड़ी चुनौती है, विशेष रूप से श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे जिलों में। कपास एक अधिक पानी चाहने वाली फसल है, लेकिन बाढ़ सिंचाई से पानी की बर्बादी और मिट्टी में लवणता बढ़ती है। ड्रिप सिंचाई अपनाने से 40% तक पानी की बचत होती है और उपज में 25% की वृद्धि होती है।
ड्रिप सिंचाई पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाती है, जिससे खरपतवार की वृद्धि और वाष्पीकरण कम होता है। कपास के लिए, लेटरल पाइपों के बीच 1.2 मीटर की दूरी होनी चाहिए और ड्रिपर्स के बीच 30 सेमी से 40 सेमी की दूरी होनी चाहिए। फर्टिगेशन—यानी ड्रिप प्रणाली के माध्यम से तरल उर्वरक देना—पोषक तत्वों के अवशोषण की दक्षता में सुधार करता है।
जोधपुर के किसान हनुमान राम ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत 80% सब्सिडी पर ड्रिप सिस्टम स्थापित किया। ड्रिप लाइनों के माध्यम से घुलनशील एनपीके (NPK) देकर, उन्होंने उर्वरक लागत को 30% तक कम कर दिया और पिछले 8 क्विंटल की तुलना में प्रति एकड़ 12 क्विंटल कपास की उपज प्राप्त की।