उत्तर प्रदेश में धान उत्पादकों के लिए मानसून तैयारी गाइड
उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी इलाकों में धान (चावल) की खेती की सफलता मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। बारिश के पैटर्न के अप्रत्याशित होने के कारण, सही समय और फसल योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्वी यूपी (वाराणसी, गोरखपुर) के लिए, नर्सरी की बुवाई जून के पहले पखवाड़े में शुरू होनी चाहिए, जबकि रोपाई जुलाई के मध्य तक पूरी हो जानी चाहिए।
2025 में, वाराणसी के किसान कमलेश तिवारी को रोपाई के बाद सूखे के कारण धान की रुकी हुई वृद्धि का सामना करना पड़ा। सोलर पंप जैसा वैकल्पिक सिंचाई स्रोत आवश्यक है। बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के लिए, स्वर्ण सब-1 (Swarna Sub-1) जैसी बाढ़-सहनशील किस्मों का चयन करें, जो 14 दिनों तक पानी में डूबे रहने पर भी जीवित रह सकती हैं।
रोपाई के बाद पहले सप्ताह के दौरान जड़ों को स्थापित करने के लिए 2-3 सेमी पानी की गहराई बनाए रखें। नर्सरी के लिए, भारी बारिश के दौरान बीजों के बह जाने से बचाने के लिए ऊंचे बेड तैयार करें। ट्राइकोडेरमा विरिड (10 ग्राम/किग्रा बीज) के साथ बीज उपचार जड़ सड़न को रोकता है।